अस्सलामु अलैकुम
अबू जहल का वाकिया।
रिवायत हज़रते अब्दुल्लाह बिन उमर रदी अल्लाहू अन्हू फरमाते हैं कि मैं नवाहे बदर मेंजा रहा था। अचानक एक कब्र के अंदर से एक मुर्दा निकला। जिसकी गर्दन में ज़ंजीर था। उसने मुझे आवाज से कर कहा ऐ अब्दुल्लाह..! मुझे पानी पिला..! उसी क़ब्र के अंदर से एक और शख़्स बाहर आया। उसके हाथ में कोड़ा था। उसने मुझे पुकारा और कहा। ऐ अब्दुल्लाह..! इसे पानी ना फिला। यह काफिर है। फिर उसे कोड़ा मारता रहा यहां तक कि वह मुर्दा फिर कब्र के अंदर चला गया।
Read more....
हज़रते दानियाल अलैहिस्सलाम का वाकिया।
नबी ﷺ का मोजज़ा और अबू जहल का बेटा।
अब्दुल्लाह बिन उमर फरमाते हैं कि जब मैं अल्लाह के प्यारे नबी हुज़ूर मोहम्मद मुस्तफा ﷺ की बारगाह अक़दस में हाज़िर हुआ तो हुजूर नबी करीम ﷺ खुद ही इस वाक्य के बारे में फरमाया। अब्दुल्लाह क्या तूने उसे देखा है ? मैंने अर्ज किया हां या रसूल अल्लाह। मैंने उसे देखा है। लकी प्यारे नबी हुजूर ﷺ ने फरमाया कि वह अल्लाह का दुश्मन अबू जहल था। और वह उसका अज़ाब था जो क़यामत तक होता रहेगा।
सबक़ मेरी आज इस्लामी भाइयों..! हमें इस वाक्य से मालूम हुवा कि दुश्मन-ए-रसूल कब्र में क़यामत तक अजाब में मुबतला रहता है। और उसकी नजात नहीं होती है।
और यह भी मालूम हुआ कि जो कुछ इस दुनियां में हो रहा है हर एक का हुज़ूर नबी ﷺ को इल्म है।
नोट : मेरे अजीज भाइयों..! इस्लामिक दिलचस्प वाकिया हिंदी articles में पढ़ने के लिए इस RBN Wikipedia website को जरूर subscribe करें। और ऐसी पोस्ट को ज्यादा से ज्यादा अपने दोस्त अक़ारीब के साथ share करके सवाब हासिल करें।
ख़ुदा हाफ़िज़
0 Comments
मेरे प्यारे दोस्तों ! यहां पर आप कोई ग़लत बात कमेंट ना करें। सिर्फ पोस्ट से संबंध कमेंट करें।