अस्सलामु आलैकुम दोस्तों।
चार यार किसे कहते हैं / चार यार कौन कौन हैं..?
रिवायत हज़रते अबू अब्दुल्ला अल-मेहदी फरमाते हैं। एक साल मैं हज के लिए गया। हरम शरीफ में एक ऐसे शख़्स से मुलाक़ात हुई जो पानी नहीं पीता था। मैंने उससे वजह दरयाफ्त "पूछा" की कि तुम पानी क्यों नहीं पीते हो.? तो उसने जवाब दिया। मैं हज़रते अली रदी अल्लाहू अन्हू से मोहब्बत मोहब्बत करता और उसका का दावा करने वाला था। और हजरत अबू बकर, हजरत उमर फारूक, हजरत उस्मान ग़नी रदी अल्लाहू ताला अन्हुम से बूग़्ज़ रखता था। मैं इन तीनों को नहीं मानता था।
एक रोज़ ऐसा हुआ कि जब मैं रात में सोया। मैंने देखा कि कयामत बरपा है। सब लोग मैदाने हश्र मैं परेशान हाल है। उस वक्त मुझे सख्त प्यास लग रहे थी। प्यास बुझाने के लिए मैं अल्लाह के नबी मोहम्मद ﷺ के हौज-ए-कौसर पर जा पहुंचा। मैं वहां पर हज़रते अबू बकर, हज़रते उमर फारुख, हज़रते उस्मान ग़नी और हज़रत-ए-मौला अली रदी अल्लाहू अन्हूम को देखा जो के प्यासे को पानी पिला रहे थे। मैं सीधे हज़रते अली रदी अल्लाहू अन्हू के पास गया और पानी मांगा। तो हज़रते अली ने अपना चेहरा फेर लिया। फिर मैं हज़रते अबू बकर के पास गया। उन्होंने भी अपना चेहरा मेरी जानिब से फिर लिया। फिर हज़रते उमर फारूक और हजरत उस्मान के पास भी गए उन्होंने भी अपना चेहरा फेर लिया।
मैं बहुत परेशान हुआ। आखिर में अल्लाह के प्यारे नबी ﷺ की तलाश में आगे निकला। चुनांचे मैदाने महेश्वर में हुजूर मोहम्मद ﷺ तशरीफ़ फरमा हुवे मुझे नज़र आए। मैं उनकी खिदमत में पहुंचा और शिकायत की। या रसूल अल्लाह मुझे प्यास लग रही है। मैं हौज-ए-कौसर पर गया और हज़रत-ए-मौला से पानी मांगा तू उन्होंने अपना चेहरा फेर लिया। और मुझे पानी नहीं पिलाया। अल्लाह के प्यारे नबी मोहम्मद मुस्तफा ﷺ ने फरमाया कि मेरा अली तुम्हें पानी कैसे पिलाएं। जब तुम मेरे सहाबा से बूग़्ज़, कीना और हसद करते हो।
मैंने अल्लाह के नबी मोहम्मद ﷺ की बारगाह में अर्ज किया। या रसूल अल्लाह मेरे लिए तोबा की कोई गुंजाइश है या नहीं..? फरमाया हां है। सच्चे दिल से तोबा करो। और मेरे सहाबा से मोहब्बत रखो तो तुम्हें ऐसा जाम पिलाऊंगा कि उम्र भर तक तुम को प्यास नहीं लगेगी। चुनांचे मैंने वैसा ही किया जैसे मेरे आका मोहम्मद मुस्तफा ﷺ ने फरमाया। और मुझे ऐसा जाम दिया जिसको मैंने पिया। जब मेरी आंख खुली तो मुझे प्यास ना थी। और ना ही अब कभी प्यास लगती है। पानी पियो या ना पियो बराबर है। अब मैं सच्चे दिल से अल्लाह के रसूल के तमाम सहाबा से अकीदत मोहब्बत रखते हैं। मोहम्मद ﷺ के चार यार से बेपनाह मोहब्बत रखते हैं।
सबक़ मेरे प्यारे इस्लामी भाइयों..! इस रिवायत से हमें पता चला कि हज़रते अबू बकर, हज़रते उमर फारुक़, हज़रते उस्माने ग़नी और हज़रत अली रदी अल्लाहू अन्हूम से मोहब्बत रखने वाले अपनी आखिरत को दुरुस्त कर लेते हैं। और उनसे बुग़्ज़, कीना अदावत दुश्मनी रखने वाला अपनी आखिरत को बर्बाद कर देता है।
और यह भी बात मालूम हुई कि जिसको हजरत अबू बकर, हज़रते उमर फारूक़, हजरत उस्मान से मोहब्बत ना हो। तो उससे हज़रते मौला अली रति अल्लाहू अन्हू भी खुश नहीं।
हमें यह बात भी जानने को मिली कि मैदाने महशर में हौजे कौसर पर हज़रते अबू बकर, उमर, उस्मान और मौला अली मुश्किल कुशा ( इनको चार यार कहते हैं) और पांचवा हमारे मुस्तफा ﷺ हैं जो प्यासों को जामे कौसर पिलाएंगे।
नोट : मेरे अज़ीज़ भाइयों..! अब आप ही बताइए कि जो शख़्स दुनियां में रहकर मेरे नबी के सहाबा से अदावत दुश्मनी बूग़्ज़ किना असद रखें। तो क्या मैदान महशर में उनको जाने कौसर मिलेगा। नहीं मिल सकता हरगिज़ नहीं।
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