अमीर का सवाल फकीर का जवाब
☑ आइए एक बार नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की बारगाह में दरूद शरीफ पढ़लें..!
।।अल्लाहुम्मा रब्बू मोहम्मदिन सल्ला अलैही वसल्लम, नह्नू इ़बादु मोह़म्मदीन सल्ला अलैही वसल्लम, सल्लल्लाहु तआ़ला अलैही वसल्लम।।
दिलचस्प हिकायत एक फ़कीर मिस्र की जामा मस्जिद के सामने खड़े होकर भीख मांग रह था। मिस्र के कुछ बड़े-बड़े दौलतमंद लोग उधर से गुजरे उस फकीर ने उन लोगों से सवाल किया, कुछ मांगा लेकिन उसे कुछ ना मिला।
उन मालदार लोगों में से एक की जेब से थैली गिर पड़े। उसमें 500 दिनार थे। उनके जाने के बाद फकीर की नजर उस पर पड़ी। उसने उठाकर अपने पास रख ली। इतने में थैली मांगने आया फिर से पूछने लगा कि यहां पर मेरी थैली छूट गई थी कहीं तुमको तो नहीं मिली है..?
फ़कीर ने कहा __ मिली है। फकीर ने उसे दिनार के थैले दे दिया। वह शख़ बहुत खुश हुआ और कहा मैं आपको 15 दिनार इनाम देता हूं। फ़कीर ने कहा। मैं हरगिज़ न लूंगा क्योंकि जब मैंने आपसे एहसान के तौर पर कुछ सवाल किया तो आपने नहीं दिया। लेकिन अब अगर आप से पूछ लूंगा तो इसका मतलब यह होगा "दीन देकर दुनिया लेना" होगा।
सबक़ इससे पता चलता है कि पहले ज़माने के मुसलमान फ़कीर भी दयानतदाखर होते थे। दिन को दुनिया पर हर हाल में मुक़द्दम रखते थे। आजकल तो अमीर लोगों के अंदर भी यह बात क़तई तौर पर नहीं पाई जाती है।
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