हज़रतेदानियालअलैहिस्सलाम कौन है..?
मेरे अज़ीज़ इस्लामी भाइयों..! मैं आपसे गुज़ारिश करता हूं कि पढ़ने से पहले। सबसे पहले गुंबदे खज़रा में आराम फ़रमाने वाले आक़ा लंबे-लंबे हाथों से भीक देने वाले दाता गरीब, मिस्किन, यतीम, बेवाऔं का मसीहा मुस्तफा जाने रहमत, शम-ए- बज्मे हिदायत जनाब-ए-मोहम्मद रसूलुल्लाह ﷺ की बारगाह-ए-अक़दस में अपनी गुलामी का सबूत देते हुए दुरु शरीफ पढ़ने का सवाब-ए-दारैन हासिल करें...!
।।अल्लाहुम्मा रब्बू मोहम्मदिन सल्ला अलैही वसल्लम, नह्नू इ़बादु मोह़म्मदीन सल्ला अलैही वसल्लम, सल्लल्लाहु तआ़ला अलैही वसल्लम।।
रिवायत ➢ अल्लाह के प्यारे रसूल ﷺ ने फ़रमाया कि दानियाल अलैहिस्सलाम अपने रब से यह दुआ की थी कि उन्हें मोहम्मद मुस्तफा ﷺ की उम्मत दफन करें। जब अबू मूसा अशअ़री रदी अल्लाहू अन्हू किला-ए-तसतर फ़ता किया तो उन्होंने हज़रते दानियाल अलैहिस्सलाम को एक ताबूत के अंदर इस हाल में पाया कि उन के तमाम जिस्म और गर्दन की रगें बराबर चल रही थीं।
सबक़ ➢ मेरे प्यारे दोस्तों इस वाक्य से हमें पता चलता है कि अल्लाह के पैगंबर इस दुनिया से जाने के बाद भी जिंदा हैं। और सैकड़ों साल गुज़र जाने के बाद भी उनका जिस्म ज़िंदा और सही सालिम रहता है। और जो शख़्स नबियों के सरदार के बारे में ऐसा लिखें कि इस दुनियां से जाने के बाद मर कर मिट्टी में मिल गए हैं। तो बताइए ऐसे लोगों की गुमराह और बद-मज़हब काफ़िर होने में किस को शक नहीं होगा।
नोट : दोस्तों तो एक सच्चे और अच्छे मुसलमानों का अक़ीदा यही होता है कि अल्लाह के नबी अपने-अपने क़बरों में ज़िंदा है जिस तरह दुनियां में थे, और अल्लाह ताला उन्हें रिज़्क़ आता फ़रमाता है।
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